ख़ून से लथपथ एक काया. फ़ेंका गया था लहरताल मे उपजी झाड़ियों मे रो रहा था शिशु बिलख-बिलख कर ईश्वरीय[...]
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बेचारा मजदूर- नीतू रानीबेचारा मजदूर- नीतू रानी
बेचारा मजदूर दिनभर करता मजदूरी परिवार से रहता दूर, बेचारा मजदूर। कभी खेत में काम है करता कभी सड़कों पर[...]
कैसी ये पहेलियाँ- एस.के.पूनमकैसी ये पहेलियाँ- एस.के.पूनम
मनहरण घनाक्षरी (कैसी ये पहेलियाँ) पतझड़ में पत्तियां, दूर चली उड़कर, शांत मौन नभचर,सूनी-सूनी डालियाँ। कलियाँ भी मुर्झाकर, बिखरी है[...]
नारी क्यों मजबूर हुई – नीतू रानीनारी क्यों मजबूर हुई – नीतू रानी
नारी क्यों मजबूर हुई जब उसपर अत्याचार क्रूर हुई, तभी नारी मजबूर हुई। नारी पर पुरुषों का बज्र प्रहार, नारी[...]
बाल मजदूर- अश्मजा प्रियदर्शिनीबाल मजदूर- अश्मजा प्रियदर्शिनी
अपने बचपन को खोता कितना वह लाचार। मलिन सी काया,दुर्बल छवि,जीर्ण- शीर्ण आकार। अत्यंत आवश्यक प्यासे को पानी भूखे को[...]
डाॅक्टर के पास- नीतू रानीडाॅक्टर के पास- नीतू रानी
विषय-जाति गणना जाति गणना कार्य करते हुए लगी ठंड , दाहिने हाथ और पीठ में उठा भयानक दर्द। इसी भयानक[...]
शराबी पति- नीतू रानीशराबी पति- नीतू रानी
विषय-शराब तर्ज-सजनवां बैरी हो गईल हमार। सजनवां शराबी हो गईल बीमार कतौ सेअ आबै हमरा ऊ मारै, दैय बीछ –[...]
नारी व्यथा- अमरनाथ त्रिवेदीनारी व्यथा- अमरनाथ त्रिवेदी
आज के भटकते समाज मे , नारी की स्थिति क्या होती है ? दिन -रात निज कर्म में रह ,[...]
कलयुग सा संसार- नीतू रानीकलयुग सा संसार- नीतू रानी
ये है कलयुग सा संसार जिसमें है दुखों का भंडार, यहाँ लड़ाई-झगड़े रोज हैं होते होते हैं मारकाट। ये है[...]
जीवन का मर्म – कुमकुम कुमारी”काव्याकृति”जीवन का मर्म – कुमकुम कुमारी”काव्याकृति”
भूलकर भेदभाव,दिल में हो समभाव, जीभ पर रहे सुधा,प्रेम रस पीजिए। होठों पर मुस्कान हो,गम का न निशान हो, मीठे[...]
