अनुकरण से सीखना
बोलने से पहले बच्चे,
आँखों से पढ़ना सीखते हैं।
कहने से पहले दुनिया को,
करके देखना सीखते हैं।
जो देखा, वही सीखा उसने,
जो पाया, वही अपनाया।
जीवन की पहली पाठशाला,
अनुकरण ने ही सजाया।
माँ की बोली, पिता का आचरण,
गुरु की दृष्टि, मित्रों की चाल।
सब मिलकर गढ़ते जाते हैं,
बालक का व्यक्तित्व विशाल।
कहना कम, करना ज़्यादा—
यही शिक्षा का सार बने,
शब्द तभी विश्वसनीय हों,
जब आचरण आधार बने।
यदि दीप बनो तो उजियारा,
यदि काँटे तो पीड़ा बाँटो।
बालमन शीशे-सा होता है,
जैसा दिखाओ, वैसा पाओ।
इसलिए हे शिक्षक, समाज,
हर कदम सोचकर रखना,
क्योंकि बच्चों के सीखने में
अनुकरण ही है व्याकरण।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी,विशिष्ट शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर, सुपौल
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