जमाना सुनता सबकी बातें ,
सोच समझ करता निज मन की ।
बनेगी पहचान तो तभी उसे ही ,
निकलेगी बात ज़ब उसके दिल की ।
कदम – कदम पर मिलती नसीहत
मिलते साथ देनेवाले मुश्किल से ।
इतनी भलमनसाहत – उतनी शराफत ,
न रहता सभी के सच्चे दिल से ।
जिनके मन, वचन , कर्म एक से होते ,
देते साथ वही खुश दिल से ।
समझनेवाले सच्चाई जीवन की
मन के न काले होते किसी मुश्किल से ।
जीना है जिंदगी में ज़ब तो ,
कर्तव्य के साथ ही जीते जाओ ।
ऐंठन न कभी मन में जरा लाना,
सुधा भक्ति रस जरा पीते जाओ ।
कोशिश रहे भूल न हो तुझसे ,
चाहे कठिनाई का दौर भी आए ।
भूलें न कभी अपने करम को ,
चाहे लक्ष्य बड़ा मिल जाए ।
न शिकवा करें किसी भी जन से ,
किसी की भूल से भूल यदि बन जाए ।
पर अपने भूल कबूलने में कभी भी
मन में न संकोच जरा दिखलाएँ ।
दिल की ज़ब मुराद हो पूरी ,
ऐठन न कभी मन में छाए ।
घमंड न हो तनिक भी दिल में ,
विनम्र भाव ही सदा अपनाएँ ।
अमरनाथ त्रिवेदी
पूर्व प्रधानाध्यापक
उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैगरा
प्रखंड बंदरा , जिला मुजफ्फरपुर
