भोर आज हो रहा।
हर्ष राज हो रहा।।
आर-पार शोर है।
लोहड़ी हिलोर है।।
आज सूर्य आ गया।
लाल सब्र छा गया।।
हर्ष तो नवीन है।
दर्द से विहीन है।।
दीन औ धनी मिले।
प्यार पुष्प में खिले।।
पर्व तो मिला रहे।
दर्प को हिला रहे।।
ऊॅंच-नीच भावना।
भंग आज साधना।।
देश या विदेश में।
हर्ष है दिनेश में।।
मस्त लोग नाचते।
है पतंग साधते।।
धर्म काज आज से।
हो रहा रिवाज से।
पर्व तो अनेक हैं।
मुख्य बात एक है।।
नव्य अन्न वर्ष के।
है प्रतीक हर्ष के।।
रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
मध्य विद्यालय दरवेभदौर
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