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पुण्य के पल का समझकर राज, पर्व हम अपना मनाएँ।
जाह्नवी जल में नहाकर आज, पर्व हम अपना मनाएँ।।
हर्ष से अति पावनी जलधार, सिंधु में थी लीन होती।
उस दिवस को दे रहे आवाज, पर्व हम अपना मनाएँ।।
है फसल से अब भरा भंडार, हर्ष सबके नैन में है।
व्यक्त करता है विचार समाज, पर्व हम अपना मनाएँ।।
लोहड़ी माघी मकर संक्रांति, और पोंगल उत्तरायण।
है हमें खिचड़ी बिहू पर नाज, पर्व हम अपना मनाएँ।।
गुड़ दही चूड़ा लिए तिल संग, आज खाएँ आप खिचड़ी।
कर पतंगो से यहाँ आगाज, पर्व हम अपना मनाएँ।।
रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला
बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क- 9835232978

