मकर संक्रांति आई है संग में खुशियां लाई है।
तिल के लड्डू की खुश्बू ने घर में सुगंध फैलाई है।।
मुरही, चूड़ा, तिल की लाई मम्मी ने बहुत बनाई है।
चूड़ा, दही ,तिलकुट ,मिठाई से खाने की थाली सजाई है।।
राजू ,रोहन , मोहन के संग राधा ने पतंग उड़ाई है।
मकर संक्रांति त्यौहार पर सबने घर में धूम मचाई है।।
स्नान करके स्वयं मां ने फिर बच्चों को नहलाई है।
नये – नये कपड़े बच्चों को दादी ने पहनाई है ।।
तिल गुड़ चावल से बना प्रसाद ईश्वर को भोग लगाई है।
‘तिल बहवी नय’ बोल -बोलकर हर बच्चों को खिलाई है।।
बेटों के संग बेटियों ने भी “हां “में सिर को हिलाई है।
असीम संतुष्टि लेकर मां फिर मंद- मंद मुस्काई है।।
आशीर्वाद बड़ों से पाकर मन में उमंगें छाई है।
हम सबने यह पर्व मनाकर मिथिला की संस्कृति बचाई है।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी विशिष्ट शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर सुपौल
