जब नव वर्ष की खुशी मिली – अमरनाथ त्रिवेदी

ज़ब  नव वर्ष की खुशी मिली,
बढे चलो बढे चलो ।
वैर हो    कुपंथ से ,
कुमार्ग  से बचे  चलो ।

तेजस्वी की शान  हो,
मनस्वी  की संतान  हो ।
सुमार्ग में न  क़ोई  अवरोध  दे ,
अलग ही उसकी तान  हो ।

बाधाओं से न तुम डरो ,
स्वपंथ पर बढे चलो ।
वैर   हो कुपंथ  से ,
कुमार्ग  से  बचे  चलो ।

नवोल्लास  की बहार है,
स्वजन का  भी प्यार  है ।
विश्वास की सुरभियों से ,
फैला  हुआ  दुलार  है ।

नव वर्ष  में सृजन  करो ,
अभिमान की न शान पर ।
दिल से दिल जिसे  जुड़  सके ,
बोलो वही हर बात  को पहचान  कर ।

अमरनाथ त्रिवेदी
पूर्व प्रधानाध्यापक
उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक   विद्यालय बैंगरा
प्रखंड  बंदरा, जिला  मुजफ्फरपुर

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