हिंदी, हिन्द की आवाज, प्राकृत,पाली,संस्कृत से क्रमशः निःसृत, भारतीयता की पहचान हिंदी। भारतेंदु से पंत तक, महादेवी से भावपूरित, निराला के अनन्त तक, दिनकर की ओज से, रेणु के संसार…
हिंदी गीत – राघव दूबे
हिन्दी भारत की परिभाषा बनकर, विश्व पटल पर छाई हिंदी जन गण मन में गूंज रही है, सुरों सजी शहनाई हिंदी… ऋतु वसंत के नेह निमंत्रण, पर फूली फूली फुलवारी पहले सावन की…
पितृ तर्पण -राम किशोर पाठक
पितृ तर्पण – निश्छल छंद देख रहें हैं पूर्वज अपने, करिए जाप। भूल गए या याद किए हैं, उनको आप।। आश्विन आया पूर्वज रखते, तर्पण खास। देख रहें हैं बस…
स्वास्थ्य रक्षा -राम किशोर पाठक
स्वास्थ्य रक्षा – सरसी छंद स्वास्थ्य हमारा सही रहे तो, रहती है मुस्कान। काम समय से होता रहता, मिलती नव पहचान।। इसकी रक्षा धर्म हमारा, ले हम इतना जान। मनोभाव…
भारत की शोभा हिंदी – दयानंद तिवारी
भारत की शोभा हिंदी है। हम हिंदी के शिक्षक हैं, हिंदी का अलख जगाते हैं। हिंदी ही हमारी भाषा है, हिंदी का महत्व बताते हैं।। हिंदी के लिए ही…
शराब कभी न पिएंगे – बिंदु अग्रवाल
आज अचानक मन में एक खयाल आया..गम को कम कैसे करें यह सवाल आया.. सोचा चलो हम भी पीकर झूमते है,यूँ शराब में अपनी खुशी ढूंढते हैं। सुना है यह…
हिंदी हमारी अस्मिता – मृणाल गौतम
कविता लेखनं-हिंदी-हमारी अस्मिता
सुखी होगा परिवार- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
रूप घनाक्षरी छंद में पितरों को तिल जल- कुशाग्र अर्पण करें, उनके आशीष से ही, सुखी होगा परिवार। नदियों या तालाबों में- खड़े हो तर्पण करें, सुख शांति हेतु करें,…
जैसी होती भावना- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
जैसी होती भावना मनहरण घनाक्षरी छंद मानने से पत्थर में- मिलते हैं भगवान, दूध में मक्खन सिर्फ, देखे मेरी भावना। दिल की पुकार से तो- मन की मुरादें मिलें, श्रद्धा…
हमारी अस्मिता की पहचान – राजा कुमार
Hamari Asmita Ki pahchan