कदम तुम्हारी कह रही, अब पथ का तुम सम्मान करो । सुलग रही अग्नि जो भीतर, अब उसका आह्वान करो । बहने दो…
शराब कभी न पिएंगे – बिंदु अग्रवाल
शराब कभी न पिएंगे आज अचानक मन में एक खयाल आया.. गम को कम कैसे करें यह सवाल आया.. सोचा चलो हम भी पीकर झूमते है, यूँ शराब…
गाना आता नहीं पर गाना चाहता हूँ मैं – रंजीत कुमार सिंह
स्वरचित कविता
हिंदी: सुर वाणी की जाया- राम किशोर पाठक
हिंदी, सुर वाणी की जाया- किशोर छंद सुर वाणी की जाया कहिए, हिंदी को। भूल रहे सब क्यों है गहिए, हिंदी को।। हृदय भाव में फिर से भरिए, हिंदी को।…
दूर तक चलते हुए – शिल्पी
घर की ओर लौटता आदमी होता नहीं कभी खाली हाथ हथेलियों की लकीरों संग लौटती हैं अक्सर उसके अभिलाषाएं, उम्मीद, सुकून और थोड़ी निराशा घर लौटते उसके लकदक कदम…
हिंदी : हमारी अस्मिता – अविनाश कुमार
हिन्द देश के हिंदी हैं हम, हिंदी से है पहचान हमारी। रक्त बहे या लहू बहे, बस हिंदी है अस्मिता हमारी यह देश की शान है, बैभव है मातृभूमि की…
मेरी हिंदी तू मेरे मौन को आवाज़ देती है। – रीतु वाजपेयी
तू मेरी मौन पीड़ा में, मेरी आवाज़ बनती है, पोंछकर अश्रु, सरल शब्दों से दुलार करती है। तेरे अस्तित्व में मेरी लेखनी, विहार करती है, गूढ़ अर्थों से तू…
हिंदी मेरी भाषा
“हिंदी मेरी भाषा ” हिंदी मेरी भाषा है, हिन्दी मेरी आशा है। हिंदी का उत्थान करना, यही मेरी जिज्ञासा है। हिंदी की बोली अनमोल, एक शब्द के की विलोम।…
अँखियाँ भिगोने से- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद कड़ी धूप खिलने से- परेशानी बढ़ जाती, मौसम बदल जाता, बरसात होने से। मजदूर किसानों की- मेहनत रंग लाती, फसलें उपजतीं खेतों में बीज बोने से। सुबह…
मित्र की मित्रता राम बाबू राम
मित्र की मित्रता मित्र की मित्रता है सबसे प्यारी, मित्र है तो जग न्यारी। मित्र है तो खुशियां सारी, मित्र है तो सुंदरता हमारी। मित्र है सुख-दुख का साथी, मित्र…