ममता की मूर्ति मनहरण घनाक्षरी छंद में पालन पोषण हेतु, खुद कष्ट सहती है, ममता की प्रतिमूर्ति, भारतीय नारी है। बच्चों को भी पालती हैं, गृहस्थी संभालती हैं, चौका-चूल्हा करने…
बहना हाल बताना- राम किशोर पाठक
बहना हाल बताना- गीत राखी का त्यौहार निकट है, बहना हाल बताना। रचनाओं से बांँध सको तो, रचना दें नजराना।। बहना हाल बताना.. भाई-बहन प्रेम को वंदन, करता है जग…
सच्ची दोस्ती – राहुल रंजन
सच्ची दोस्ती… दोस्ती एक प्यारा सा नाम, जैसे फूलों में हो मिठा जाम। हँसी में साथ, ग़म में सहारा, सच्ची दोस्ती, सबसे प्यारा। बचपन की मस्ती भरी बातें, स्कूल की…
मित्र – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
मित्र! मित्र सरल है मित्र सहज है, मित्र पीयूष अनुराग परम है। मित्र हैं दिल के राज सारथी, तपिश में सहज सुबास मित्र है। आनन्द के पथ में आनंदित, तप्त…
अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस – राम किशोर पाठक
अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस आओ जानें हम सच्चाई, जीवन में क्या होता है। हँसते गाते लोगों में भी, आँखें नम क्यों होता है।। रिश्तों में जीवन है उलझा, रिश्तों की मर्यादा…
वर्षा और सावन- अमरनाथ त्रिवेदी
वर्षा और सावन सावन आया बड़ा सुहावन , लगता है इसमें मनभावन । इस माह होते कई पावन , ये दिल को लगते बड़े सुहावन ।। मेघ गर्जन होते हैं…
अकेलापन- गिरींद्र मोहन झा
अकेलापन जीवन की रणभूमि में हम सब अकेले हैं, सुख-दुख बांटने हेतु ही इस जग के मेले हैं, जब पड़ जाओ अकेला तुम, सोचो अकेले ही काफी हो, है तुम्हारा…
जीवन का क्या मोल है – महाचण्डिका छंद गीत – राम किशोर पाठक
जीवन का क्या मोल है – महाचण्डिका छंद गीत सुख की इच्छा में फँसा, विवश हुआ वह मौन है। जीवन का क्या मोल है, यहाँ समझता कौन है।। दे हाथों…
मुंशी प्रेमचंद विलक्षणता के प्रतीक – अमरनाथ त्रिवेदी
मुंशी प्रेमचंद विलक्षणता के प्रतीक कौन भूल सकता है प्रेमचंद को , जिनकी मार्मिक इतनी कृति है । ग्राम्य जीवन के सुख दुख भरे डगर की , उस वर्णन में…
जीवन – गिरींद्र मोहन झा
जीवन दिन और वर्ष की तरह ही होता है जीवन, दिन में सूर्य उदित होते अरुणिमा के संग, सुबह का सुहावना होता पल, जैसे बालापन, ओज-तेज बढ़े तो मानो जैसे…