जिसको मित्र बनाया है – लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठक

जिसको मित्र बनाया है – लावणी छंद गीत आँख खोलकर इस भूतल पर, ज्यों हमने मुस्काया है। रिश्ते नाते हमने जग में, खुद पर खुद ही पाया है।। सबने बतलाया…

मित्र – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

मित्र! मित्र सरल है मित्र सहज है, मित्र पीयूष अनुराग परम है। मित्र हैं दिल के राज सारथी, तपिश में सहज सुबास मित्र है। आनन्द के पथ में आनंदित, तप्त…

दोहावली- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

दोहावली “””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” बहें भावना में नहीं, कभी सहजता भाव। हीन कलुषता त्याग कर, बनें कर्म की नाव।।०१ भावों में भीगें सदा, मत बह जाएँ आप। धैर्य भाव के ज्वार की,…

सपने को साकार करें हम – अमरनाथ त्रिवेदी

सपने को साकार करें हम गलत बातों में कभी  नहीं पड़ेंगे, अपने  सपने को  साकार करेंगे । हर पल चिता छोड़ हम चिंतन को ध्याएँ , हर  मुश्किल  से चिंतन…

बचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद – राम किशोर पाठक

बचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद हरपल सबसे मिलकर कहते। हम-सब अपने बनकर रहते।। बरबस कुछ भी कब हम करते। सुरभित तन से मन सब हरते।। बचपन अपना अभिनय करता। बरबस…

जीवन की बगिया

।।जीवन की बगिया।। जीवन की बगिया में देखो फूल भी है और कांटे भी खड़ी धूप और अंगारे भी चलते जीवन की राहों में  जीवन के रंग निराले भी  …