एक अद्वितीय कवि दिनकर केवल बातों पर ही बात नहीं, तथ्यों पर प्रखर रूप से बात करे। कवि वैसा हो[...]
मेरी हर यात्रा- अवनीश कुमारमेरी हर यात्रा- अवनीश कुमार
सुन री सखी-सहेली! वे राम बने, मैं मर्यादा की सीमा बनूँ, वे कृष्ण बने, मैं राधा की काया बनूँ,[...]
बेटियाँ- मधु कुमारीबेटियाँ- मधु कुमारी
बेटा वंश तो वंश की नींव होती है बेटियाँ! दो कुलों की आन-बान-शान होती है बेटियाँ! कुदरत जब हो[...]
बेटियाँ- गिरीन्द्र मोहन झाबेटियाँ- गिरीन्द्र मोहन झा
धन्य वह गेह, जहाँ खिलखिलाती हैं बेटियाँ, धन्य वह गेह, जहाँ चहचहाती हैं बेटियाँ, धर्म-ग्रंथ कहते हैं, गृह-लक्ष्मी होती बहु-बेटियाँ,[...]
बेटी के सपने – अमरनाथ त्रिवेदीबेटी के सपने – अमरनाथ त्रिवेदी
बेटी के सपने की उड़ान को, अब कमतर कर नही तौलेंगे। बेटी सफलता की उड़ान है, उस पर कीचड़ नही[...]
कब तक हार से डरते रहोगे – गुड़िया कुमारीकब तक हार से डरते रहोगे – गुड़िया कुमारी
कब तक यूँ ऐसे बैठे रहोगे, कब तक हार से डरते रहोगे। कदम आगे बढ़ाना होगा, अगर लक्ष्य को[...]
कहाँ गए वो दिन – अमरनाथ त्रिवेदीकहाँ गए वो दिन – अमरनाथ त्रिवेदी
कहाँ गए वो दिन ? जिसकी दास्तां इतनी करीब थी । थे लोग प्यार में ऐसे पगे , जहाँ हर[...]
सुन री सखी- अवनीश कुमारसुन री सखी- अवनीश कुमार
सुन री सखी! यदि वे मुझसे कह न पाते, लिख कर ही अपनी व्यथा छोड़ तो जाते। विश्वास के बंधन[...]
भगवान विश्वकर्मा- अमरनाथ त्रिवेदीभगवान विश्वकर्मा- अमरनाथ त्रिवेदी
सजी धजी यह धरा सुहानी , कितनी प्यारी लगती है। विश्वकर्मा जी की कृपा मात्र से , यह छटा निराली [...]
मैं हूँ हिंदी- विवेक कुमारमैं हूँ हिंदी- विवेक कुमार
मैं हूँ हिंदी, कहने के लिए, आपकी बिंदी, सर का ताज हूँ, राज-काज का साधन, भाषा की अभिव्यक्ति हूँ, पतंगों[...]
