खिचड़ी खिचड़ी मन में पक रही,बिना किसी आधार। घर में पकती आज तो,बहती है रसधार।। बहती है रसधार,आज का दिन है पावन। लटती मस्त पतंग,गगन में लगे लुभावन।। व्यंजन दिखते…
अंजाम होता है -रामकिशोर पाठक
अंजाम होता है- गजल १२२२-१२२२-१२२२-१२२२ सदा ही कर्म अच्छे का सुखद अंजाम होता है। किया जिसने यहाँ ऐसा जगत में नाम होता है।। नहीं कोई यहाँ जिसका कभी उसको न…
योगासन गीतिका :-कार्तिक कुमार
पद्मासन पालथी मार, पैर जंघा पर धर, रीढ़ सीधी, नेत्र बंद कर। श्वास-प्रश्वास सम, मन हो शांत, लाभ—ध्यान बढ़े, तनाव हो अंत। वज्रासन घुटनों के बल बैठो ध्यान से, पीठ…
फसलों का त्योहार है खिचड़ी-एम० एस० हुसैन कैमूरी
फसलों का त्योहार है खिचड़ी प्रकृति का उपहार है खिचड़ी देखिए फसलों की पैदावार बढ़ाकर लाई खुशियों की बौछार है खिचड़ी नए फसल भी लगा लिए हैं ,हम-सब ने फिर…
मकरसंक्रांति आई है – मनु कुमारी
मकर संक्रांति आई है संग में खुशियां लाई है। तिल के लड्डू की खुश्बू ने घर में सुगंध फैलाई है।। मुरही, चूड़ा, तिल की लाई मम्मी ने बहुत बनाई है।…
प्रेम की पतंग-मनु कुमारी
मकरसंक्रांति आओ, मिलकर मनाते हैं, प्रेम की पतंग पिया हम ,साथ में उड़ाते हैं।। रंग बिरंगी फूलों से हम आशियां को सजाते हैं। प्रेम की पतंग पिया हम साथ में…
पर-हित चिंतन-राम किशोर पाठक
पर-हित चिंतन- दोहा छंद गीत पर-हित चिंतन में सदा, रहते हैं जो लीन। ईश्वर की उनपर कृपा, रहती नित्य नवीन।। पर-पीड़ा से हो दुखी, करते सदा उपाय। करते नहीं विचार…
मिथिला हाट – मनु कुमारी
सीता माय के पावन जन्मभूमि , मधुबनी झंझारपुर । ताहि में बनल अछि मिथिला हाट । गेलों घुमय सपरिवार। दुई बजे सब ओतय पहुंचलों । ओतय देखय छी उमड़ल भीड़…
मिथिला हाट -मनु कुमारी
मिथिला हाट सीता माय के पावन जन्मभूमि , मधुबनी झंझारपुर । ताहि में बनल अछि मिथिला हाट । गेलों घुमय सपरिवार। दुई बजे सब ओतय पहुंचलों । ओतय देखय छी…
प्रभाती पुष्प -जैनेंद्र प्रसाद
प्रभाती पुष्प विविध त्योहार मनहरण घनाक्षरी छंद मानते हैं लोग साथ, लोहड़ी पोंगल बिहू, मकर संक्रांति जैसे, विविध त्योहार हैं। प्रयाग में कल्पवास, पातक का करे नाश, जाने से बदल…