हिंदी हृदय की वाणी है, बचपन में मैंने सुनी अपनी नानी से हिंदी में नयी कहानी है । भाषा की जननी है हिंदी , साहित्य की गरिमा हिंदी , जन…
हिन्दी आज निशब्द है-सुरेश कुमार गौरव
तब देश के भाषा की जननी और गौरव थी हिन्दी भाषा! जब समृद्ध हुई तब नाम मिली भारतभूमि की मातृभाषा !! चहुं ओर पहुंचकर हिन्दी भाषा जन-जन की पुकार बनी…
शान है “हिंदी” -डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा
जान है हिन्द जुबान है हिंदी प्यारे वतन की “शान” है हिंदी , शब्द-कोश की सबसे सुन्दर “मातृभाषा” का नाम है हिंदी । पूज्य है जितनी जन्मभूमि उतनी ही प्यारी…
जालिम सर्दी-मीरा सिंह
आयी जब से जालिम सर्दी सबका जीना मुश्किल कर दी। छाया है चहुंओर कुहासा देखो सर्दी की बेदर्दी। सन सन करती पछुआ हवाएं कांप रही है पूरी धरती। मौसम लगता…
कोई मरे कोई सैर करे-मो.मंजूर आलम
बाजारों में सजे हैं स्वेटर मफलर कंबल रजाई रंग बिरंग के! कुछ बच्चे ठिठुर रहे हैं पड़े हैं घरों में दुबके ! और कोई निकला है गुलमर्ग की सैर पे!…
मित्रता की सार्थकता-सुरेश कुमार गौरव
जब जीवन में मिलते हैं सच्चे और अच्छे मित्र मन मस्तिष्क में उभरते हैं सार्थक जीवन चित्र! मित्र है वह जो हमारे अतीत काल को जानता है हमारे भविष्य में…
बाल गीत – नीलिमा कुमारी
खेलोगे कूदोगे होगे खराब। पढ़ोगे लिखोगे होगे नबाब। अब यह बात पुरानी है। लिखनी नयी कहानी है। अब खेलों की बारी है। रूकना मत कोशिश जारी है। खेल खेल में…
बेज़ुबाँ-अदिति भूषण
आज दर्द की महफ़िल में, अश्क़ों ने कुछ ऐसा समाँ बाँधा, डूबा डाला सबको अपने ही रंग में, सपनों के घूँघरु टूटे, शिशे दिल के टुकड़े सरे आम हुए। बेबसी…
हालात से मजबूर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
जीवन के कई रंग, लोग यहां लड़ें जंग, ठंड से ठिठुरे, नहीं चादर है पास में। कोई नहीं देखे अभी, दरवाजे बंद सभी, गली में भिखारी खड़ा- भोजन की आस…
अतुल्य टीका- सुरेश कुमार गौरव
सदियों पूर्व की गई अपने यहां “टीकाओं” की अनूठी शुरुआत एक से बढ़कर एक हुए विद्वजन किए अद्भुत संस्कृति की शुरुआत। अपने देश की कई परंपराएं भी हैं बेहद अर्थपूर्ण…