मकरसंक्रांति देखो-देखो आया मकरसंक्रांति का त्योहार, जन-जन में छाया देखो खुशियाँ अपार। घर-आँगन बुहारे मिलकर नर-नार, सूर्य अराधन को देखो बच्चे भी हैं तैयार। सूर्य देव तो हैं हमारे जीवन…
मां की ममता-जैनेन्द्र प्रसाद रवि
मां की ममता मां की ममता सबसे न्यारी, अपनी संतान पर दुनिया वारी। भूख नहीं पर हमें खिलाती, खिलौने देकर हमें मनाती। पीछे-पीछे दौड़ी चली आती, हाथ में लेकर दूध…
संज्ञा को जाने-ज्योति कुमारी
संज्ञा को जाने सभी के नाम को राधा मोहन या श्याम को कोई जगह पटना, दिल्ली या बाँका, टेबूल, कुर्सी, दूध दही या टाका (रूपया) हँसाई, रुलाई, लड़कपन और बचपन…
आशाओं के सिरमौर-दिलीप कुमार गुप्त
आशाओं के सिरमौर हे प्रखर चेतना के संवाहक शुभ संस्कृति के संरक्षक राष्ट्र गौरव के सुमंगल तिलक जीवन मूल्यों के हिम धवल सजल श्रद्धा से ओतप्रोत प्रखर प्रज्ञा के निर्मल…
मकर संक्रांति-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
मकर संक्रांति उत्तरायणी पर्व का, हुआ सुखद आगाज। ढोल नगाड़े बज रहे, होंगे मंगल काज।। सूरज नित अभिराम है, जीवन का आधार। देव रूप पूजे सदा, सारा ही संसार।।…
एक भारतीय युवा संन्यासी-भवानंद सिंह
एक भारतीय युवा संन्यासी विश्व पटल पर हुए अवतरित थे युवा संन्यासी महान, नाम था उनका नरेन्द्रनाथ दुनियाँ में उनकी अलग है पहचान। आर्यावर्त्त की भूमि पावन है पाकर ऐसे…
मन की स्थिरता-भोला प्रसाद शर्मा
मन की स्थिरता अनन्त है इसका कोई भी उपमा दिया जाना सहज नहीं। पर मानव जीता अवश्य है, बिना सत्य के वह बीच भँवर में अटक जाता, उनका मार्ग अवरोध…
कर्तव्य पथ पर बढ़ चल-अशोक कुमार
कर्तव्य पथ पर बढ़ चल आएगी मुश्किलें बहुत, राह चलना नहीं आसान। कहीं खाई है तो कहीं पथरीली राहें, कर्तव्य पथ पर बढ चल।। कभी बर्फीले तूफानों में, तो…
महावीर-अवनीश कुमार
महावीर निरन्तर प्रभेदक बन जो पर्वतों को काटा करते रहते हैं सागर की धारा को जो मोड़ सके ऐसा बल भर कर चलते रहते हैं लड़ जाते है जो बिजलियों…
जाड़े का एहसास-अनुज कुमार वर्मा
जाड़े का एहसास जाड़ा आया, जाड़ा आया ठंडे की सौगात लाया l कहीं शितलहर तो कहीं, बर्फ की बौछार लाया l धूप सबको प्यारा लगता, आग से जुड़े रिश्ता नाता…