Devkant Mishar

गंगा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’गंगा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

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पापनाशिनी मोक्षदायिनी। पुण्यसलिला अमरतरंगिनी। ताप त्रिविध माँ तू नसावनी तरल तरंग तुंग मन भावनी।। भक्ति मुक्ति माँ तू प्रदायिनी सकल[...]

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Anupama

प्रकृति-अनुपमा अधिकारी प्रकृति-अनुपमा अधिकारी 

0 Comments 12:06 pm

प्रकृति जब जब करोगे प्रकृति से छेड़छाड़, तब तब होगा सुन लो पृथ्वी पर नरसंहार! पेड़, पहाड़, नदियां सुंदर इससे[...]

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Dr. Anupama

उम्मीदों की उड़ान-डॉ. अनुपमा श्रीवास्तवाउम्मीदों की उड़ान-डॉ. अनुपमा श्रीवास्तवा

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उम्मीदों की उड़ान धैर्य रख तू “मन” के पंछी घनेरा धुँध छट जायेगा, उम्मीदों की झोली लेकर फिर नया “सवेरा”[...]

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संभल जाओ-प्रियंका प्रियासंभल जाओ-प्रियंका प्रिया

0 Comments 4:39 pm

संभल जाओ चलो अब तो संभल जाओ वृक्ष को खुद से गले लगाओ।। वृष्टि से धरा को सराबोर करो पर्यावरण[...]

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