रुठी क्यों दुखहरणी माता- बिंदु अग्रवाल

रूठी क्यों दुखहरणी माता रूठी क्यों दुखहरणी माताकैसे मैं तुझे मानाऊँ?कैसी विकट प्रतीक्षा की हैकैसे मैं तुझे बताऊँ? न जानूँ मैं जप तप ध्यानाकैसे तुझे रिझाऊँ?मुझमें नहीं है धैर्य राम…

त्वमेका शिवा- राम किशोर पाठक

त्वमेका शिवा – स्त्रोत सदा शक्ति आलंब भक्तान माता, न जानामि योगं जपं नैव ज्ञाता।सदा कल्पनाशील तुभ्यम् भजेहं, नमो दिव्य रूपं नमो सर्व त्राता।। त्वमेका शिवा आदि रूपा अनूपा, त्वमेका…

किताब- आशीष अंबर

सब चीजों से सबसे प्यारी,होती है किताब । उलझे – उलझे हर सवाल का,देती है जवाब । इसको पढ़कर बन जाता है,मूर्ख भी विद्वान । अनपढ़ शिक्षित हो जाता है,पा…

माता जगतारिणी -रामपाल प्रसाद सिंह

हे माता! जगतारणी कुंडलिया छंद माता! तुम जगतारणी, जाना है भवपार। थाल लिए द्वारे खड़ा,कर ले तू स्वीकार।। कर ले तू स्वीकार,समय चाहे ले जितना। चरणों के ही पास,जगह दे…

जय स्कंदमाता स्नेहलता द्विवेदी

जय स्कंदमाता ममतामयी माँ ममतामयी तू है जगदम्बा, तू कार्तिकेय सुत जननी है। ताड़कासुर बध संकल्प लिये, माँ तू संतन हित करनी है। चार भुजायें धारण कर, पद्मासना तू महारानी…

ममतामई मां -जैनेंद्र प्रसाद रवि

प्रभाती पुष्प ममतामई मांँ कलाई में शोभता है- कंगन व बाजूबंद, मनमोहता है देवी, माता का सिंगार है। जिज्ञासु श्रद्धालु जन- करते हैं आराधना, जयकारा गूंज रहा, माता दरबार है।…

हे शुभंकरी -रामकिशोर पाठक

हे शुभंकरी सुधा त्रिधा त्वम् गायत्री। सती शिवा त्वम् सावित्री।। त्वयि नंदजा राधा त्वम् भक्तवत्सला आद्या त्वम् आदिशक्ति शक्ति दात्री। सती शिवा त्वम् सावित्री।। रसे रूपे च गंधे त्वम् कणांकणे…

लोहार – रामपाल प्रसाद सिंह

लोहार लोहे पर निर्भर जीवन,लोहार हूॅं मैं।कम पैसे में काम करूॅं,उपकार हूॅं मैं।विस्मित कर देता जग को,फनकार हूॅं मैं।मानसून के संग चलूॅं,बौछार हूॅं मैं।जिसने बसा लिया उसका,संस्कार हूॅं मैं।चोर उचक्के…