मकरसंक्रांति आओ, मिलकर मनाते हैं,
प्रेम की पतंग पिया हम ,साथ में उड़ाते हैं।।
रंग बिरंगी फूलों से हम आशियां को सजाते हैं।
प्रेम की पतंग पिया हम साथ में उड़ाते हैं।।
प्रेम की पतंग हूं मैं ,पिया तुम डोर हो,
अन्धकार रूपी रात मैं ,तुम मेरे भोर हो।
विश्वास के स्वच्छंद नभ में,चलो सैर कर आते हैं।
प्रेम की पतंग पिया साथ में उड़ाते हैं।।
मैं हूं सहधर्मिणी ,तुम मेरे श्रृंगार हो।
सुखद दाम्पत्य के तुम हीं सशक्त आधार हो।
माता – पिता की सेवा कर जीवन आनंदमय बनाते हैं।
प्रेम की पतंग पिया साथ में उड़ाते हैं।।
सुख- दुख के साथी हैं हम ,जन्मों जनम से।
साथ निभायेंगे हम, वादा है कसम से।
प्रेम एकता का चलो, संसार हम बसाते हैं।
प्रेम की पतंग पिया साथ में उड़ाते हैं।।
अपनी संस्कृति के सुगंध को, फैलाए जो चारों ओर।
नफरत को दूर करें ,थामे बस प्रेम डोर।
अपने दाम्पत्य की फुलवारी में, आओ ऐसे फूल हम खिलाते हैं।
प्रेम की पतंग पिया साथ में उड़ाते हैं।।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी विशिष्ट शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी,राघोपुर,सुपौल
