माता वाणी से विनय रामकिशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

माता वाणी से विनय- विधाता छंद गीत

पुकारूँ मैं तुम्हें माता, जरा मुझपर तरस खाओ।
हरो अज्ञानता मेरी, सरस कुछ ज्ञान दे जाओ।।

जरा वीणा बजा दो माँ, सभी सुर ताल जिसमें हैं।
मिले सुर ज्ञान कुछ मुझको, अभी कंगाल जिसमें हैं।।
सवारी हंस का लेकर, यहाँ माता चली आओ।
हरो अज्ञानता मेरी, सरस कुछ ज्ञान दे जाओ।।०१।।

लिए तुम हाथ में पुस्तक, जगत को ज्ञान भरती माँ।
रचूँ कुछ गीत सुंदर सा, अगर शुभ छंद वरती माँ।।
कृपा करके जरा मैया, सृजन नव छंद करवाओ।
हरो अज्ञानता मेरी, सरस कुछ ज्ञान दे जाओ।।०२।।

वसन सम श्वेत अपनी ही, करो मन आज मेरी माँ।
चरण रच से तिलक करके, करूँ गुणगान तेरी माँ।।
बनूँ मैं विज्ञ अब माता, दया जो आज दिखलाओ।
हरो अज्ञानता मेरी, सरस कुछ ज्ञान दे जाओ।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क- 9835232978

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