तीसवां दिन जनवरी के रामपाल प्रसाद सिंह

RAMPAL SINGH ANJAN

गीतिका छंद
तीसवाॅं दिन जनवरी को,जो हुआ अच्छा नहीं।
मार गोली संत हिय को,क्या किया अच्छा कहीं?!!
हिल गयी बुनियाद निष्ठा,सब लगे चित्कारने।
गोडसे जो भी किये थे,सब लगे धिक्कारने।।

शाम होते कर रहे थे,याद श्री प्रभु राम को।
पास में कोई खड़ा तब,था मिटाने नाम को।।
आपसे तो विश्व को ही,मिल रहा आलोक था।
छा गया तब से ॲंधेरा,विश्व का ही शोक था।।

मार कर फाॅंसी चढ़ा जो,वह हुआ है क्या अमर?!
तब यही कर ले जगत में, छोड़कर सारी डगर।।
मौत हिंसा से हुई थी,किंतु मुख पर राम थे।
हो गए भव पार बिल्कुल,और क्या कुछ काम थे।।

रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
मध्य विद्यालय दरवेभदौर

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply