पद्यपंकज छंद सर्दी का असर. .भावानंद सिंह

सर्दी का असर. .भावानंद सिंह


—- धनाक्षरी छंद ——
——————-
शीत का असर देखो,
सब  पे  बराबर  है,
बिछावन पर दुबके, ओढ़े कम्बल है।

सर्द हवा चल रही,
ठिठुर रहा तन है,
हो रहा बचाव उनका,जो सबल है।

दिन दीनों के कटता,
जिसे कपड़े कम है,
ऐसे लोगों का,अलाव पर ही बल है।

सड़कें वीरान पड़ी,
धुंध का कहर बड़ी,
लग रहा जैसे यह इलाका चम्बल है।

                   भवानंद सिंह
                    ( शिक्षक )
              मध्य विद्यालय मधुलता
                रानीगंज, अररिया

1 Likes
Spread the love

1 thought on “सर्दी का असर. .भावानंद सिंह”

Leave a Reply