अम्बे कण मन में बसती हो चमक असुर भयाक्रान्त हुआ, सज्जन साधु मन शांत हुआ। माँ साध्वी परम् तू तेजोमय, चन्द्रघण्टा भगवती मान हुआ। प्रेम स्नेह रसधार सहित, अम्बे कण…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- फाग में महका है हर अंग– राम किशोर पाठक
- तुम चलो तो सही-अमृता कुमारी
- देखो आयी होली – आयी होली- श्री रवि कुमार
- फाग-राम किशोर पाठक
- फाग क्या होती अम्मा बोल-राम किशोर पाठक
- बसंत की बहार- मुन्नी कुमारी
- गर्मी आई -नीतू रानी
- सामाजिक न्याय _रामकिशोर पाठक
- पैगाम – राम किशोर पाठक
- भरे हुए भंडार समय पर लूटो-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’