वतन ये वतन ये वतन हमारा चमन हमारा वतन तुझपे जान हम लुटाएंगे हमको तेरी कसम हमको तेरी कसम ये[...]
Tag: अवनीश कुमार
वे स्वर्णिम दिन-अवनीश कुमारवे स्वर्णिम दिन-अवनीश कुमार
वे स्वर्णिम दिन वे भी क्या स्वर्णिम दिन थे जब सारी शिक्षा गुरु चरणों में मिल जाया करती थी वेद[...]
मोक्ष की प्रतिक्षा-अवनीश कुमारमोक्ष की प्रतिक्षा-अवनीश कुमार
मोक्ष की प्रतीक्षा थक जाता जब मानव का तन मन ईश्वर से मोक्ष दिलाने को करता नमन लेकिन आत्मा है[...]
मित्र-अवनीश कुमारमित्र-अवनीश कुमार
मित्र मित्र वह जो मन की बात को पढ़ ले मित्र वह जो सारे जहां में एक अनमोल रिश्ता गढ़[...]
प्रेमचंद-अवनीश कुमारप्रेमचंद-अवनीश कुमार
प्रेमचंद क्यों है कथासम्राट का जन्मदिन उपेक्षित क्या उनकी रचनाएँ अब है दम तोड़ती क्या उस कलमकार की रचना में[...]
कलम-अवनीश कुमारकलम-अवनीश कुमार
कलम मैं जिसके हाथ बस जाऊँ उसके मैं भाग्य बनाऊँ। मैं हूँ बड़ी अनोखी चीज़ संशय इसमे करे न कोई[...]
