एक गिलहरी बड़े पेड़ पर एक गिलहरी, उसे बुलाते सभी सुनहरी। जन्म जब यह लेती है, आँखों से अंधी होती है। धीरे धीरे बढ़ती जाती, फिर दुनियाँ देख पाती। झाड़ियों…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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