कन्हैया आ जाओ कृष्ण कन्हैया रास रचैया आ जाओ एक बार। भक्त तुम्हारे द्वार खड़े हैं दर्शन दो एक बार। कन्हैया आ जाओ दरस दिखा जाओ। द्रोपदी ने रो रो…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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