कैद हो गई जिन्दगी कैद हो गई जिन्दगी, यूँ ही समय व्यतीत हो रहा, ऐसा लगता है मानो, दुर्गम है यह रास्ता। सभी लोग हैं डरे हुए, सहमें और सिमटे…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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