गजल – राम किशोर पाठक

अब और क्या बाकी बताना रह गया- गजल २२१२-२२१२-२२१२ अब और क्या बाकी बताना रह गया। इस जिंदगी का गुल खिलाना रह गया।। हर शख्स होता खास अपने आप में।…