Tag: देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

अपना गणतंत्र-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’अपना गणतंत्र-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:07 pm

अपना गणतंत्र  अपने गणतंत्र का जगत में मिलकर ही मान बढ़ाएँगे। इसकी बगिया में हम नित एक नया प्रसून खिलाएँगे।।[...]

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धन्य हैं सृजक धन्य टी.ओ.बी.-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’धन्य हैं सृजक धन्य टी.ओ.बी.-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 4:02 pm

धन्य हैं सृजक धन्य टी.ओ.बी. धन्य हैं सृजक, धन्य टी.ओ.बी. जिसने इसे नया आयाम दिया। बुद्धि विवेक से सींच सींच[...]

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मकर संक्रांति-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’मकर संक्रांति-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 3:23 pm

  मकर संक्रांति उत्तरायणी पर्व का, हुआ सुखद आगाज। ढोल नगाड़े बज रहे, होंगे मंगल काज।। सूरज नित अभिराम है,[...]

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साथी हाथ बढ़ाना- देव कांत मिश्र दिव्यसाथी हाथ बढ़ाना- देव कांत मिश्र दिव्य

0 Comments 2:23 pm

साथी हाथ बढ़ाना मेरे साथी हाथ बढ़ाना गिरते हुए को तू उठाना। कर्म पथ से विचलित मनुज को सद्कर्म का[...]

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प्यारा देश हमारा है-देव कांत मिश्र दिव्यप्यारा देश हमारा है-देव कांत मिश्र दिव्य

0 Comments 12:20 pm

प्यारा देश हमारा है वसुधा से जो लगन लगाये, वही देश का प्यारा है। पावन भावन सरिता की नित, चमक[...]

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गुरु महिमा-देव कांत मिश्र दिव्यगुरु महिमा-देव कांत मिश्र दिव्य

0 Comments 1:27 pm

गुरू महिमा पान सुधा रस ज्ञान गुरु, इसे लीजिए जान। चाह ज्ञान की सब रखें, करें सदा सम्मान।। राग द्वेष[...]

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स्वर्ग सा सुन्दर धरा बनाएँ-देव कांत मिश्र दिव्यस्वर्ग सा सुन्दर धरा बनाएँ-देव कांत मिश्र दिव्य

0 Comments 10:29 am

स्वर्ग सा सुन्दर धरा बनाएँ धरा हमारी अति पुनीत है विचार मंगल औ सुनीत है। पावन मन को खूब सजाएँ[...]

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नेहरू चाचा और बालमन-देव कांत मिश्र दिव्यनेहरू चाचा और बालमन-देव कांत मिश्र दिव्य

0 Comments 7:26 pm

नेहरू चाचा और बालमन अमन शांति संदेशा लाकर बनाया भारत को अभिराम। इनको करें ही सदा सलाम बाल दिवस इनके[...]

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मैं हूँ भारतवासी-देव कांत मिश्र दिव्यमैं हूँ भारतवासी-देव कांत मिश्र दिव्य

0 Comments 8:11 am

 मैं हूँ भारतवासी मैं हूँ भारतवासी प्रतिदिन, भारत का गुण गाऊँ। मातृभूमि से नेह लगाकर, इसका मान बढ़ाऊंँ।। निर्मल पावन[...]

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वाणी-देव कांत मिश्र दिव्यवाणी-देव कांत मिश्र दिव्य

0 Comments 11:43 am

वाणी वाणी मधुरिम नित ही बोलें हृदय तराजू इसको तोलें। बोल परिष्कृत सबको भाये जन-जन में ही तब यह छाये।।[...]

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