नजर आए माता पिता के रूप में मुझको चारो धाम नजर आए। जब मैं देखूं इन्हें सदा मुझको भगवान नजर आए। आते हैं जब भी ये सामने और न कुछ…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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