नमन करें विश्व के इस भाल को, उदग्र इस त्रिकाल को, विश्व गुरु के मान को, नमन करें नमन करें। वेद की ऋचा जहाँ, सहस्त्र तान छेड़ती, विश्व के कल्याण…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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