नवल किरण सुबह हुई उजियार हुआ जग, नवल किरण है आई। खाट छोड़ सब आलस त्यागो, नवीन पथ पर चलना है भाई।। आलस्य छोड़ किसान चला खेतों पर, धरा को…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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