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निर्वाण-मनोज कुमार दुबेनिर्वाण-मनोज कुमार दुबे

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निर्वाण हे मातृभूमि वसुधा धरा वसुंधरा। अर्पित है तेरे चरण रज लोहित मेरा।। तू विभवशालिनी विश्वपालिनी दुःखहर्त्री है। भय निवारिणी[...]

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