निर्वाण हे मातृभूमि वसुधा धरा वसुंधरा। अर्पित है तेरे चरण रज लोहित मेरा।। तू विभवशालिनी विश्वपालिनी दुःखहर्त्री है। भय निवारिणी शांतिकारिणी सुखकर्त्री है।। निर्मल तेरा नीर अमृत सा उत्तम। शीतल…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- बाल अभिलाषा – अमितेश कुमार (मलिकौरिया)
- मत कर अभी ब्याह मेरी मैया – नमन मंच – नीतू रानी
- सावित्री बाई फुले – सुमन सौरभ
- कलाधर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
- स्वास्थ्य – बैकुंठ बिहारी
- उमर हमर नौनिहाल यौ – मनु कुमारी
- बाल-विवाह – रत्ना प्रिया
- ठंड का प्रभाव – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
- बगिया (बिहारी मोमोज) – मनु कुमारी
- बसंत- दोहा छंद गीत – राम किशोर पाठक