पेड़ लगाना होगा घुटते घुटते कहीं ये उपवन मर न जाए, हालत देख धरा की जीवन डर न जाए, ध्यान धरो ओ ! मानव कुछ अपने कर्मों का, कहीं तुम्हारी…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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