प्रकृति का आंचल प्रकृति में अपना आंचल कर दिया हम पर बलिहार, पर हमने बन स्वार्थी कर दिया आंचल को तार-तार, आओ हम सब पेड़ बचाएँ, नित नए पेड़ लगाएं,…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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