बस !मेरे सामने …………। बस !मेरे सामने……….।बैठे हैं, उनींद आंखों में सपने लिए,एकटक निहारते काले श्यामपट्ट,तलाशते हुए भविष्य के रास्ते।बस ! मेरे सामने…………।कलम लिए नाज़ुक,दुर्बल हाथों में,धीमे स्वर में बुदबुदाते…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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