माँ अनमोल है माँ तूँ अनमोल है, तेरा न कोई मोल है। मैं तो नादान था, हर गम से अंजान था। नाम मेरा है क्या, ये तूने बताया। माँ तूँ…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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