माँ तुम हो महान गाऊँ मैं माॅं तेरा गुणगान, करुँ मैं सदा तेरा ही बखान, तुम्हीं तो हो मेरा अभिमान, तुम नहीं तो ये जग है सुनसान, माँ! सच में…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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