Tag: मानव

Jainendra

मानव-जैनेन्द्र प्रसाद रविमानव-जैनेन्द्र प्रसाद रवि

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मानव यह मानव जीवन पाकर भी नहीं किया कोई परोपकार है। मोह, माया में लिपटा रहा, यह मानव तन बेकार[...]

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मानव-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’मानव-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:45 am

मानव अन्तर्मन से देख जरा तुम तन यह कितना प्यारा है। बड़े भाग्य से तुझे मिला है। पावन निरुपम न्यारा[...]

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