मैं त्रयलोकपावनी गंगा हूँ मैं हूँ गंगा! त्रयलोकपावनी, पापनाशिनी, भवमोचिनी , भवतारिणी, भवभामिनी गंगा l मैं हूँ सकल मनोरथ पूर्ण कामिनी, कर स्नान मुझमें प्राणी पाते हैं, सभी कष्टों से…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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