Tag: रामपाल प्रसादसिंह अनजान

RAMPAL SINGH ANJAN

हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजानहरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान

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हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान सिद्धिदात्री आकीर्ण तेरी सिद्धियों से, जब चराचर था दुखी। शिव ने किया मनुहार तुझसे,[...]

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RAMPAL SINGH ANJAN

खो रही है अस्मिता को – रामपाल प्रसादसिंह अनजानखो रही है अस्मिता को – रामपाल प्रसादसिंह अनजान

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खो रही है अस्मिता को – रामपाल प्रसादसिंह अनजान है गिरी दीवार भारी, टूटता आधार से। रो रही सीता हमारी,[...]

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