पद्यपंकज Bhakti,Festival,padyapankaj,Teachers Of Bihar,ToB PadhyaPankaj,काव्य लेखन हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान

हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान


RAMPAL SINGH ANJAN

लेख सुनें तैयार

हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान

सिद्धिदात्री

आकीर्ण तेरी सिद्धियों से, जब चराचर था दुखी।
शिव ने किया मनुहार तुझसे, कर दिया माँ ने सुखी।।
हे कालिका माँ! हस्त दाएँ, चक्र सह सोहे गदा।
कर वाम में हैं शंख उत्पल, जय कराती हैं सदा।।

दिन शुभ महानवमी सुधा रस,भक्तजन पीकर रमे।
मृत प्राप्त हर दानव हुआ तो, देवगण जीभर रमे।।
संस्थापना हो धर्म की हर, कार्य संभव कर दिया।
जो सोचकर भयभीत थे जन, आपने ही कर लिया।।

सब मूर्तियों में जान आए, सिद्धियों के योग से।
पर आदमी निर्बल हुआ है, रात-दिन सुख-भोग से।।
हे माँ! जगा दो चेतना को, मोह के परित्याग से।
मम मोक्ष मिल जाए खुशी से, सिद्धियों के राग से।।

‘अनजान’ भी पहुॅंचे हुए हैं, न्याय के दरबार में।
पूजन किये हैं आज विधिवत, शांति के संसार में।।
शुभ दीप घी के भी जलाए, और सब हैं थाल में।
बल-आयु-धनवर्धन करें माॅं, हम रमे शुभ ख्याल में।।

रामपाल प्रसादसिंह अनजान
ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः
ओम नमः शिवाय

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply