शिवरात्रि है – राम किशोर पाठक

छंद – घनाक्षरी शिव शंकर की भक्ति, श्रद्धा भाव यथाशक्ति, मिटाती यह आसक्ति, बनें दया-पात्र हैं। मनाएँ हर माह में, त्रिपुरारी की छाँह में, कृपालु के पनाह में, रहें दिवा-रात्र…

दोहा विधान – राम किशोर पाठक

आओं हम सीखा रहे, दोहा लिखना खास। सरल तरीका है यही, करना है अभ्यास।।०१।। जान रहा हूँ मैं यहाँ, ज्ञान हमारा अल्प। फिर भी हूँ बतला रहा, दोहा का संकल्प।।०२।।…

कुँवर सिंह – राम किशोर पाठक

मनहरण घनाक्षरी मृगराज सी हुँकार, चमकती तलवार, अंग्रेजों को ललकार, किए जो कमाल थे। उम्र अस्सी किए पार, यौवन सी स्फूर्ति धार, रविसुत हो सवार, बने जो विकराल थे। गोली…

पृथ्वी दिवस – राम किशोर पाठक

विषय – पृथ्वी दिवस छंद – कुण्डलिया पृथ्वी दिवस मनाइए, करिए सदा विचार। फैल रहे प्रदूषण का, करना कम रफ्तार।। करना कम रफ्तार, सदा बढ़ते हैं जाना। अधिक लगाकर पेड़,…

पिता – राम किशोर पाठक

द्विगुणित सुंदरी छंद सबका बोझ उठाना, करना नहीं बहाना। अपना दर्द छुपाना, हर पल ही मुस्काना।। सबका शौक पुराना, उफ्फ नहीं कर पाना। संघर्ष की कहानी, नहीं सुनाना जाना।। हाथ…

बदलें बिहार आओ – राम किशोर पाठक

द्विगुणित सुंदरी छंद शिक्षक सभी हमारे, बदलें बिहार आओ। शिक्षा दीप जलाओ, ज्ञान पुंज फैलाओ।। प्रण यह करने आओ, औरों को समझाओ। जीवन जीने आओ, जीना भी सिखलाओ।। अंतस अभी…

जीने का अधिकार – राम किशोर पाठक

छंद – दोहा जीने का अधिकार है, सबको एक समान। जीव-जंतु सबका करें, रक्षा बन बलवान।।१।। रखिए हरपल हीं यहॉं, दीन-हीन का ध्यान। जीने का अधिकार दे, और उन्हें सम्मान।।२।।…