पथ अपना अपना – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर जीवन के इस महासमर में, कोटि-कोटि राही चलते हैं, सबके अपने-अपने पथ हैं,[...]
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राही-एस. के. पूनमराही-एस. के. पूनम
राही हे राही! जिस राह पर चल पड़े हैं क़दम, उस राह को कभी छोड़ना नहीं, राहें होगी हजारों कंटकों[...]
राही-अशोक कुमारराही-अशोक कुमार
राही जिंदगी के राहों में, रोड़े बहुत आएंगे। संभल संभल कर चलना होगा, कभी खाई कभी गहराई में।। हम राही[...]
