माँ की लाल साड़ीअलमारी के कोने में अब भी टंगी है वो लाल साड़ी,जिसमें बसती है माँ की मुस्कान — प्यारी, आत्मीय, सादगी से भरी।दीवाली की रात हो या छठ…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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