वह जो वतन पर कुर्बान हो गए वह जो वतन पर कुर्बान हो गए, आँखें नम और आवाम को जुबां दे गए, वतन पर सदके, जो अपनी जान दे गए,…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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