अगर चाह हो कुछ करने की, करें नित्य श्रम का सम्मान। श्रम के आगे झुकते सारे, पूरे होते लक्ष्य महान।। एकलव्य के श्रम को देखें, वीर धनुर्धर हुआ महान। मल्लाहों…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- उड़ी वासंती खुशबू -आशीष अम्बर
- जैनेंद्र प्रसाद रवि -बसंत का आगमन
- होली आई -ब्यूटी कुमारी
- कुत्ते पाल रहे-नीतू रानी
- होली का रंग-कार्तिक कुमार
- बसंत का आगमन -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
- फाग में महका है हर अंग– राम किशोर पाठक
- तुम चलो तो सही-अमृता कुमारी
- देखो आयी होली – आयी होली- श्री रवि कुमार
- फाग-राम किशोर पाठक