संसार- दोहे – राम किशोर पाठक

संसार- दोहे जैसी मन की भावना, वैसा ही संसार। अपने-अपने कर्म की, झेल रहे सब मार।।०१।। दुख को जो है झेलता, कहे दुखी संसार। खुशियाँ जिसको हैं मिली, वह करता…