वर दे वीणावादिनी – बिंदु अग्रवाल

वर दे वीणावादिनी,जय माँ तू हंसवाहिनीहृदय तिमिर को मिटातू ज्योत ज्ञान की जला। अज्ञानता की कालिमा काअब ना अट्टहास हो,दैदिप्यमान हो धराप्रकाश ही प्रकाश हो। धर्म मार्ग पे चलेंअधर्म का…