सुन गोरैया सुन “गोरैया”! तेरे जैसी मैं भी एक चिड़ियाँ होती जब जी करता उड़ते-उड़ते सैर जहान का कर आती । न रहता कोई टोका-टोकी न करता कोई रोका-रोकी फिक्र…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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