Uncategorized छंद मनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनम August 8, 2024 Dev Kant MishraDev Kant Mishra 0 Comments 6:57 pm जलता है रात-भर, स्नेह भरा यह दीप, बुझ गया यादें छोड़, सविता के आने से। जल उठे साँझ ढले, बाती-तेल[...] और पढ़ेंऔर पढ़ें